घर लौट जाने की मेरी कहानी अभी अधूरी है!
कुछ काम बाकी रह गये, कुछ निपटाने जरूरी हैं!
मैं जानता हूँ तू अधूरी है, अधूरा है इश्क़ मेरा,
कुछ उमीदो का बोझ है, कुछ एहसान चुकाने जरूरी हैं!
वो कहते हैं जी ले अपनी ज़िंदगी, आज़ाद है तू,
थोड़ी जमीन तेरी, थोड़ा आसमान तेरा, पर कुछ मुकाम पाने जरूरी हैं!
जितेन्द्र!