ये
सुबह मुझे याद दिलाती है मेरे सपनों को
जीने की,
ये
किरने मुझसे बात करती हैं अंधेरे के साथ लड़ने की,
ये
हवा मुझे सुनाती है गीत- तु भी उड़ चल संग मेरे!
ये दिशाये मुझे दिखाती
हैं आईना, करले खुद के होने का यकीन,
ये फिजाये कहती हैं
के है मुमकिन तेरी सपनो की दुनिया भी,
ये ऋतुऐ करती हैं वादा
के तेरे आँसू भी देंगे आज तेरे होठों को मुस्कान,
ये पक्षि कहते
हैं मुझसे खुले आकाश के नीचे,
हर लम्हा कह रहा है
के आज देखेगी दुनिया तेरी हिम्मत की उड़ान!
जितेंद्र!
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