तुमसे विदा होने की कहानी
जैसे भोर के उजास में मधयम चांदनी
टूटी सड़के, बिखरा कूड़ा और चौखट तक जमा पानी
आंखों से ओझल दूर उड़ती पतंग
जैसे मेघ धनुष में बिखरे सतरंग
जलता चूल्हा, ,उड़ता धुवाँ और कुछ फूटे हुऐ बरतन
इन काकुक दिशाओं में अभिलाषा है पुनः मिलन की
जैसे मिल जाती है सरिता, समुंद्र में कहीं
एक लम्बा रास्ता, दो अजनबी मुसाफिर और संगदिल जिंदगी
मैं जानता हुं सब यहीं रह जायेगा, जो मेरे पास है, प्रार्थना की तरह पवित्र और अदम्य तुम्हारे पास होने का ऐहसास....
Jitu's composition...
जैसे भोर के उजास में मधयम चांदनी
टूटी सड़के, बिखरा कूड़ा और चौखट तक जमा पानी
आंखों से ओझल दूर उड़ती पतंग
जैसे मेघ धनुष में बिखरे सतरंग
जलता चूल्हा, ,उड़ता धुवाँ और कुछ फूटे हुऐ बरतन
इन काकुक दिशाओं में अभिलाषा है पुनः मिलन की
जैसे मिल जाती है सरिता, समुंद्र में कहीं
एक लम्बा रास्ता, दो अजनबी मुसाफिर और संगदिल जिंदगी
मैं जानता हुं सब यहीं रह जायेगा, जो मेरे पास है, प्रार्थना की तरह पवित्र और अदम्य तुम्हारे पास होने का ऐहसास....
Jitu's composition...
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